बिहार की बाढ़ — मिष्टी और अनिकेत
बिहार की बाढ़ — मिष्टी और अनिकेत बिहार में उस साल बारिश कुछ ज़्यादा ही बेरहम थी। आसमान कई दिनों से रो रहा था और नदी… जैसे अपना किनारा भूल चुकी थी। पानी धीरे-धीरे गाँव की गलियों, घरों और लोगों की ज़िंदगी में उतर रहा था। हर तरफ अफरा-तफरी थी। कोई अपना घर छोड़ रहा था, कोई अपने बच्चों को सीने से लगाए भाग रहा था, और कोई अपनी आँखों के सामने अपनी पूरी ज़िंदगी पानी में बहते हुए देख रहा था। उसी गाँव में मिष्टी रहती थी। और उसी गाँव में अनिकेत । दोनों एक-दूसरे को बचपन से जानते थे। उनके बीच दोस्ती थी, अपनापन था… और शायद उससे भी कुछ ज़्यादा। लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिन्हें नाम देने की हिम्मत नहीं होती। अनिकेत रोज़ किसी न किसी बहाने मिष्टी के घर के पास से गुजरता था। मिष्टी भी खिड़की से उसे जाते हुए देखती थी। दोनों जानते थे कि उनके दिल में कुछ है। बस… दोनों ने कभी कहा नहीं। शायद उन्हें डर था कि कहीं कह देने से जो रिश्ता अभी खूबसूरत है, वही टूट न जाए। उस शाम बारिश अचानक और तेज़ हो गई। नदी का पानी गाँव में घुस चुका था। लोग ऊँची जगहों की तरफ भाग रहे थे। मिष्टी अपने घर में ...